PUBG BAN: इतनी कमाई कैसे करता था जाने पूरी बात

वैसे तो भारत सरकार ने 118 मोबाइल एप्स को बैन किया है इसमें गेमिंग एप से लेकर डेटिंग बिजनेस और दूसरी तरह के कई ऐप शामिल है लेकिन हर जगह चर्चा पब जी मोबाइल गेम बंद होने की ही हो रही है प्रतिबंध के बाद पब्जी अब आप मोबाइल पर तो नहीं खेल सकते लेकिन डेक्सटॉप वर्जन अभी काम कर रहा है। 

भारत सरकार के इस फैसले से कुछ बच्चे भले ही नाराज हो लेकिन बताया जा रहा है कि इस गेम को खेलने वाले बच्चों के माता-पिता बड़े खुश हैं पब्जी खेलने की बच्चों की सबसे ज्यादा वही परेशान थे माता-पिता की परेशानी होती थी। 

आलम यह था कि साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चर्चा कर रहे थे तो एक अभिभावक ने उनसे पूछा मेरा बेटा नौवीं क्लास में पढ़ता है पहले वह पढ़ने में बहुत अच्छा था पिछले कुछ समय से ही ऑनलाइन गेम  के प्रति उसका झुकाव ज्यादा पड़ गया जिसकी जैसे उसकी पढ़ाई पर फर्क पड़ रहा है मैं क्या करूं सवाल पूरा होने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा यह PUBG  वाला है क्या उनके इतना कहते ही पूरा ऑडिटोरियम ठाकुर से गूंज उठा। 

ये भारत में पब्जी की लोकप्रियता को बयान करने के लिए काफी है क्या अभिभावक क्या बच्चे और क्या प्रधानमंत्री जिसने पब्जी का नाम नहीं सुना हूं प्रधानमंत्री मोदी ने उसी चर्चा में कहा था यह समस्या भी है और समाधान भी लेकिन डेढ़ साल बाद इसे समस्या मानते हुए उन्हें कि सरकार ने इस गेम को बैन कर दिया।  

भारत सरकार के इस नए कदम को चीन पर डिजिटल स्ट्राइक पार्ट फ्री के तौर पर भी देखा जा रहा है पिछले 10 सालों में ऑनलाइन गेमिंग के मार्केट में  चीन ने अपना जाल फैला लिया है कि अब दुनिया के सबसे तेजी से उभरते हुए मार्केट में से एक माना जा रहा है। 

PUBG कैसे कमाई करता है 

आसान शब्दों में इस गेमिंग  बाजार को समझने के लिए आप यह समझे कि जब पैसा देकर कोई सामान खरीदते हैं तो आप खर्च करने के पहले 5 बार सोचते हैं लेकिन जब आप ऑनलाइन मोबाइल गेम खेलते हैं तो उसका खर्चा शुरुआती दौर में नहीं होता इसलिए लोगों को लगता है कि पैसे खर्च भी नहीं होते और मजा भी ले लेते हैं। 

इसी तरह ऑनलाइन मोबाइल गेम का बाजार बढ़ता जाता है हालांकि प्रोफेशनल तरीके से खेलने में और नए-नए लेवल पर जाकर खेलने में पैसे भी खर्च करने पड़ते हैं गेमिंग  कंपनियां पहले आपको इसे खेलने की आदत लगाती हैं और फिर बाद में पैसे बनाती है। 

पब्जी का पूरा नाम है प्लेयरअननोंस बैटलग्राउंड दुनिया भर में मोबाइल पर खेला जाने वाला एक पॉपुलर गेम है भारत ने भी इसके दीवानगी   है यह गेम एक जापानी थ्रिलर फिल्म बैटल रॉयल से प्रभावित होकर बनाया गया जिसमें सरकार छात्रों के एक ग्रुप को जबरन मौत से लड़ने भेज देती  है पब्जी में करीब 100 खिलाड़ी किसी टापू पर पैराशूट से छलांग लगाते हैं हथियार खोजते हैं और एक दूसरे को तब तक मारते रहते हैं जब तक कि उनमें से केवल एक न बचा रह जाए। 

भारत का स्थान गेमिंग में 

दक्षिण कोरिया की वीडियो गेम कंपनी ब्लूहोल ने बनाया है दक्षिण कोरिया की कंपनी ने इसका डेक्सटॉप वर्जन बनाया था लेकिन चीन की कंपनी टेंसेंट कुछ बदलाव के साथ उसका मोबाइल वर्जन नए नाम से बाजार में लेकर आए दुनिया में पब्जी खेलने वालों में से लगभग 25 फीसद भारत से हैं चीन में महज 17% है और अमेरिका में सिर्फ 4 % 

कई लोग मिल क्कर पब्जी गेम को एक साथ खेल सकते हैं इसमें आप नए हथियार खरीदने के लिए कुछ पैसे भी खर्च करने पड़ सकते हैं और कूपन खरीद सकते हैं इस तरीके से बनाया गया है लेकिन जितना आप खेलते जाएंगे उतना ही उसमें मजा आता जाएगा उतना ही आपको पर और हथियार खरीदना चाहेंगे जिससे आपका गेम और बेहतर होता जाएगा। 

इसमें फ्री रूम भी होता है और इसमें अलग-अलग लेबल भी होते हैं एक साथ कई अलग-अलग जगह पर रहने वाले इसे खेल सकते हैं और इसकी एक साथ लिवे  स्ट्रीमिंग  भी होती है कन्सोल  के साथ भी से खेला जा सकता है दुनिया की बात करें तो 2019 में गेमिंग  का बाजार 16.9 था इसमें 4.2 अरब डालर की हिस्सेदारी के साथ चीन चीन सबसे आगे नंबर पर अमेरिका दूसरे और  तीसरे नंबर पर जापान और ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया का नंबर आता है भारत में भी इंडस्ट्री का विस्तार तेजी से हो रहा है लेकिन $1 से भी कम का है। 

भारत रेवेन्यू के मामले में गेमिंग के टॉप 5 देशों में नहीं है लेकिन बाकी देशों के लिए उभरता हुआ बाजार जरूर है पीयूष कुमार के मुताबिक पब्जी गेम के 175 मिलियन डाउनलोड भारत  यहाँ  लोग खेलते हैं 70 मिलियन के आसपास एक्टिव यूजर  है ज्यादा लोग भारत में पब्जी खेलते हैं लेकिन कमाई की बात करें तो वह भारत से बहुत कम होती है। 

ऐसा इसलिए क्योंकि पैसा खर्च कर गेम खेलने वालों की तादाद भारत में बहुत कम है क्या इसका मतलब यह हुआ कि भारत सरकार के इस तथाकथित डिजिटल स्ट्राइक का असर चीन पर ना के बराबर होगा 

भारत में गेम खेलने वालों की तादाद दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले ज्यादा है खेलने वालों की तादाद दुनिया के दूसरे बड़े देशों के मुकाबले ज्यादा है इसलिए भविष्य में गेमिंग हब के तौर पर भारत को देखा जा रहा है अगर किसी कंपनी को भारत के बाजार से बाहर निकलना पड़ेगा तो उसका असर उसके यूजर बेस पर जरुर पड़ेगा।  

यूजर बेस  की बात करें तो भारत में 14 साल से लेकर 24 साल तक के बच्चे और युवा ऑनलाइन गेम को सबसे ज्यादा खेलते हैं लेकिन पैसा खर्च करने की बात करें तो 25 से 35 साल वाले ऑनलाइन पर पैसा खर्च करते हैं 

आखिर ऑनलाइन गेमिंग में कमाई किस तरह से होती है 

वरिष्ठ बिजनेस पत्रकार आशु सिन्हा से गेमिंग से पैसा कमाने का एक मॉडल है जिस में सुरु में फ्री में दे दो और बाद में प्रीमियम यानी खर्च करने को दूसरा मॉडल  है उससे  गेम से जुड़ी चीज़ो  खासकर उन से जुड़े कपड़ों का क्रेज बढ़ जाती है बढ़ जाता है प्रभावित होकर अक्सर उन चीजों की खरीद बढ़ जाती है इस तरीके से भी कंपनियां पैसा कमाती हैं। 

और कमाई का तीसरा रास्ता होता है उस पर आधारित विज्ञापन फिल्में बनाकर कई बार फिल्मों पर आधारित गेमस आते हैं उनकी लोकप्रियता के प्रचार प्रसार में मदद करती है और कभी गेम्स  की लोकप्रियता पर फिल्मों के प्रचार प्रसार में मदद मिलती है जो लोग इस गेम को प्रोफेशनल तरीके से खेलते हैं।

 सरकार के इस कदम से नुकसान कई लोगो पहुंचा होगा कहीं गेम खेलने वाले यूट्यूब पर भी बहुत पॉपुलर है इस तरह के गेम ऑर्गेनाइज करने वालों को भी काफी नुकसान होगा लेकिन टिक टॉक पर बैन के बाद पब्जी बैन  की चर्चा शुरू हो गई थी।  

 ऐसे में बहुत लोगों ने पहले ही दूसरे गेम पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया था भारत में अभी ऑनलाइन गेम्स  बनाने का बहुत ज्यादा चलन नहीं है भारतीय डेवलपर्स इसमें अभी काफी पीछे हैं बैन के बाद इसमें कई कंपनियां आएंगी क्योंकि अब तक उन्हें पब्जी की लोकप्रियता से खतरा ज्यादा था फिलहाल रूट की बात करें तो उनके पास फ्री फायर और कॉल आफ ड्यूटी खेलने वालों की तादाद ज्यादा है फ्री फायर सिंगापुर की कंपनी ने बनाया है और भारत में खेलने वालों की संख्या 5 के आसपास है।  

कॉल ऑफ ड्यूटी के लगभग डेढ़ करोड़ के आसपास है लॉकडाउन में यूजर की संख्या बढ़ती ही जा रही है कुछ 

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